• Rahul Taparia

शांति का स्वर

Updated: Oct 21, 2021

गूंजते हैं मन में तेरे , थोड़े जवाब, ढेरों सवाल ,

एक अजीब सी बेचैनी है, रोज़ वही, फिर वही बवाल

पाना क्या तू चाहता है, मुद्दा ये फिर आज जिलायें

आओ आज इस शांति में, शांति का स्वर मिलायें


ये हद अकेलेपन की, ये दुनिया इतनी सुनसान

आख़री घड़ी ही शायद, लगे इतनी वीरान

मुँह पर लगा है आज पट्टा, अब अपनी असल पहचान बनायें

आओ आज इस शांति में, शांति का स्वर मिलायें


आज जो है दूर, वो अपने, घर को जाना चाहता है

मुश्किल कितनी क्यों ना हो, वो पार करना जानता है

क्या है अपनी मंज़िल, आज इसका हम अनुमान लगायें

आओ आज इस शांति में, शांति का स्वर मिलायें


Few answers resonate in your mind, but many questions,

There is a strange uneasiness, everyday the same, the same commotion

What do you want to achieve, let’s resurrect the issue today

Come, in this peaceful time today, let’s mix the voice of peace


This last limit of loneliness, this world so deserted

Probably at the last watch, it seems so isolated

Masks on the face today, let’s create our real identity

Come, in this peace today, let’s mix in the voice of peace


Today whoever is far away, he wants to go to his home

No matter how difficult it is, he knows how to overcome

What is your destination, lets contemplate today

Come, in this peace today, lets mix in the voice of peace


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